

जो नदी को बाँधने निकले थे, वे खुद ही डूब गए — और जो उसे रास्ता दे गए, वे…
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जो नदी को बाँधने निकले थे, वे खुद ही डूब गए — और जो उसे रास्ता दे गए, वे…
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जो नदी को बाँधने निकले थे, वे खुद ही डूब गए — और जो उसे रास्ता दे गए, वे समंदर कहलाए। राजा आहिल के महल की दीवारें आसमान छूती थीं, पर उसकी रातें डर से छोटी पड़ जाती थीं।…
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जो नदी को बाँधने निकले थे, वे खुद ही डूब गए — और जो…
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जो नदी को बाँधने निकले थे, वे खुद ही डूब गए — और जो उसे रास्ता दे गए, वे…
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एक समय था लोगों के पास पैसा कम था। लेकिन व्यवहारिकता थी। व्यक्ति थोड़े में सुखी था। धरम करम पर…
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बरसों बाद आज फिर उस पुराने घर का दरवाज़ा खुला था। आँगन वैसा ही था, तुलसी का चौरा भी…
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बात वर्ष 2023 के जुलाई माह की है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में मेरा बवासीर का ऑपरेशन हुआ।…
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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और संस्कार उसके जीवन की अमूल्य धरोहर हैं। संस्कार ही उसे सही और गलत…
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